Home मंडी डबवाली बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही उसके पहले टीचर होते हैं -डॉ दीप्ति शर्मा

बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही उसके पहले टीचर होते हैं -डॉ दीप्ति शर्मा

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बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही उसके पहले टीचर होते हैं -डॉ दीप्ति शर्मा

मंडी डबवाली-

किसी बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही उसके पहले टीचर होते हैं जिनसे वह बोलना चलना और व्यवहार की अन्य आदतें सीखता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हर क्षेत्र में अव्वल रहे ,तो कुछ आदर्श आपको खुद भी प्रस्तुति करने होंगे। अक्सर पेरेंट्स बच्चों पर जोर जबरदस्ती कर उन्हें आदर्श और शिष्टाचार की बातें सिखाने की कोशिश करते हैं ,पर क्या आपने कभी गौर किया है कि बच्चे व्यवहार संबंधित सारी बातें आप से ही सीखते हैं। इससे कोई दो राय नहीं कि आपका बच्चा कल को आपके ही नक्शे कदम पर चलेगा। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी सुने और उसमें अच्छे गुण आए ,तो आपको उसके सामने खुद की एक मिसाल पेश करनी होगी। मिलेनियम स्कूल डबवाली के अध्यक्ष डॉ दीप्ति शर्मा जी ने बताया कि बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका अपना घर होता है। जहां पैरंट्स उसके टीचर होते हैं सामाजिकता, व्यावहारिकता और नैतिकता की बातें बच्चा घर से सीखता है। बच्चों में यदि आप आदर्श मूल्य स्थापित करना चाहते हैं तो उसकी शुरुआत खुद से ही करें। बच्चे अपने माता-पिता की तरह ही व्यवहार करते हैं प्रतिक्रिया करते हैं और उनकी नकल करते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को सिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ दीप्ति शर्मा जी के अनुसार शिक्षक पहला व्यक्ति है जिससे बच्चा स्कूल में अपने सामाजिक कौशल को सीखता है। शिक्षक उसे सहज बनाते हैं और उसे जीवन की प्रारंभिक अवधारणा और विकास कौशल का मार्गदर्शन करते हैं। घर और स्कूल में शिक्षा का संतुलन एक छात्र की वास्तविक शिक्षा को डालता है। उनकी शैक्षिक यात्रा में मदद करें और सच्ची प्रेरणा से उनके साथ यात्रा करें। सफल छात्रों में माता-पिता के प्रोत्साहन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी भूमिका केवल सीमित नहीं है बल्कि स्कूल की गतिविधियों में भी शामिल है। बच्चे के सीखने के पैमाने पर उनके घर पर कैसा व्यवहार किया जाता है इससे संबंधित है। माता-पिता अपने बच्चे के लिए रोल मॉडल होते हैं और उन्हें दोस्ताना तरीके से स्कूल के अंदर और बाहर उपन्यास तत्वों को सीखने के लिए प्रेरित करते हैं अनुस्मारक और मार्गदर्शन माता-पिता के साथ मिलकर चीजें उन्हें समर्थ और आत्मविश्वास की भावना देती है। एक साथ पाठ पढ़ना ,स्कूल में बच्चे के सीखने के साथ सबसे अच्छे तरीके में से एक हैं। माता-पिता को बच्चों की गतिविधियों की देखरेख करनी चाहिए। स्कूल और घर में बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। उनकी सामान्य आदतें बरीकी से जुड़ी होती है कि वे अपने अध्ययन में कैसा प्रदर्शन करते हैं। इसलिए समय पर सलाह दे और बचपन के दिनों से ही किसी भी असामान्य व्यवहार को ठीक करें और उन्हें अच्छे नागरिक बनाने के लिए प्रेरित करें। उन्हें अपने साथ संगठित होने में मदद करें और पाठ के लिए समय निकालें। माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को घर पर एक शांतिपूर्ण और सुखद वातावरण प्रदान किया जाए। बच्चों की उपस्थिति में परिवार की समस्याओं पर चर्चा करने से बचना अच्छा है और आनावश्यकता झगड़े के साथ झगड़े के साथ घर पर एक झंझट पैदा ना करें। स्कूली शिक्षा के अलावा उनके अध्ययन जीवन के दौरान माता-पिता की सत्रिय भूमिका उन्हें बेहतर सामाजिक कौशल और बेहतर व्यवहार के साथ विकसित करने में मदद कर सकती है। माता-पिता से अच्छे समर्थन के साथ घर में स्कूल में वेतन ग्रेड हासिल किया है और एक उच्च आत्मसम्मान के साथ बढ़ा हुआ है।

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