Home स्कूल मॉडर्न मोंटेसरी कान्वेंट स्कूल में मनाया गया मजदूर दिवस, सम्मान, एकता, अधिकारों के प्रति रहे जागरूक- डिंपल मिढ़ा

मॉडर्न मोंटेसरी कान्वेंट स्कूल में मनाया गया मजदूर दिवस, सम्मान, एकता, अधिकारों के प्रति रहे जागरूक- डिंपल मिढ़ा

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मंडी डबवाली।
डबवाली के चौटाला रोड स्तिथ मॉडर्न मोंटेसरी कान्वेंट स्कूल में बुधवार को मजदूर दिवस मनाया गया। इसके तहत सुबह प्रार्थना सभा में प्रिंसिपल डिंपल मिढ़ा ने बच्चों को मजदूर दिवस के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि अंतर्राट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत मई 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी। धीरे-धीरे यह पूरे विश्व में मनाया जाने लगा। भारत में पहली बार 1 मई 1923 को लेबर-डे मनाया गया। इस दौरान लाल झंडे का इस्तेमाल किया गया जो मजदूर वर्र्ग को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि मजदूर दिवस मनाने का उद्देश्य मजदूरों को सम्मान, उनकी एकता और उनके अधिकारों के प्रति सभी को जागरूक करना है। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को समझाया कि हमें भी किसी भी मजदूर से काम लेते वक्त उनके आत्म सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। उसे वही आदर देना चाहिए जो हम अपने से बड़ों को देते हैं। इसके साथ ही विद्यालय में काम करने वाले सभी नॉन टीचिंग स्टाफ को प्रार्थना सभा में बच्चों ने जोरदार तालियों के साथ उनका सम्मान करते हुए उनका धन्यवाद किया।

इनबॉक्स news———–

वहीँ मलोट रोड स्तिथ गोल्डन एरा मिलेनियम स्कूल में आज प्रार्थना सभा में मजदूर दिवस के उपलक्ष पर बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की जानकारी दी गयी जहाँ  डॉ दीप्ति शर्मा जी ने बच्चों से कहा मजदूर का मतलब हमेशा गरीब से नहीं होता है मजदूर वह इकाई है जो हर सफलता का अभिन्न अंग है फिर चाहे वह ईट गारे से सना इंसान हो या ऑफिस में काम करने वाला कर्मचारी हर वो इंसान जो किसी संस्था के लिए काम करता है और बदले में पैसा लेता है वो मजदूर है अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस को अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी दिवस व मई दिवस भी कहते हैं इसे पूरी दुनिया में मनाया जाता है  भारत में इसे श्रमिक दिवस भी कहते हैं मजदूर को मजदूर समझना हमारी सबसे बड़ी गलती है क्योंकि वह अपने खून पसीने की कमाई खाता है  यह ऐसे स्वाभिमानी लोग होते हैं जो अपनी थोड़ी कमाई में खुश रहते हैं और अपनी मेहनत व लगन पर विश्वास रखते हैं इन्हें किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं होता है भारत में श्रमिक दिवस को कामकाजी आदमी व महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है मजदूर दिवस को पहली बार भारत के मद्रास में 1 मई 1923 को मनाया गया था इस दिन सभी कर्मचारी एक दूसरे को यह मैसेज सेंड कर विश भी करते हैं ऐसा करने से श्रमिक दिवस के प्रति लोगों की सामाजिक जागरुकता भी बढ़ती है 1960 में मुंबई को भाषा के आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया था जिससे गुजरात व महाराष्ट्र को इसी दिन 1 मई को स्वतंत्र राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था  इसलिए मई दिवस के दिन महाराष्ट्र दिवस व गुजरात दिवस के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं श्रमिक दिवस एक ऐसा अवसर  है जब दुनिया के सभी लोग मजदूर वर्ग की सच्ची भावना को समझ कर उसका जश्न मनाते हैं  यह एक ऐसा दिन है जब सभी श्रमिकों को एक साथ सबके सामने अपनी ताकत एकजुटता दिखाने का मौका मिलता है किसी शायर ने खूब लिखा है कि मजदूर ऊंचाई की नींव है

गहराई में है पर अंधकार में क्यों
उसे तुच्छ ना समझना
 वो देश का गुरूर है
मजदूर समाज को मजबूत व परिपक्व बनाता है समाज को सफलता की ओर ले जाता है

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