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HBSE 10th Result 2020: ऋषिता ने किया हरियाणा बोर्ड 10वीं को टॉप

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हेमराज बिरट, तेज़ हरियाणा नेटवर्क:

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HBSE Haryana Result 2020: बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन हरियाणा (बीएसईएच) के जारी किए गए 10वीं क्लास के रिजल्ट में हरियाणा के हिसार जिले की ऋषिता ने 100% (500 में से 500) अंक हासिल कर इस परीक्षा को टॉप किया है. वहीं इस परीक्षा में 5 ऐसी भी छात्राएं हैं जिन्होंने 500 में से 499 (99.8%) अंक हासिल कर दूसरा स्थान हासिल किया है. दूसरे स्थान पर रहने वाली ये पांचों छात्राएं भी हिसार जिले की ही हैं. इन पांचों छात्राओं के नाम हैं- उमा, कल्पना, निकिता मारुति सावंत, स्नेह और अंकिता.
-हरियाणा बोर्ड की 2020 की 10वीं की टॉपर ऋषिता ने ऐसे की अपनी पढ़ाई- हरियाणा के हिसार जिले की नारनौंद टाउन की ऋषिता से हरियाणा बोर्ड की 10वीं की परीक्षा को टॉप करने के बारे में जब पूछा गया तो वह कहती हैं कि स्कूल से वापस घर आने के बाद मैं रोज चार से पांच घंटे की पढ़ाई किया करती थी. वह कहती हैं कि मैंने कभी ट्यूशन की क्लास नहीं अटेंड की. मैं पढ़ाई को लेकर कभी बहुत ज्यादा टेंशन भी नहीं लेती थी. मैंने हमेशा अपनी पढ़ाई मन से किया. ऋषिता यह भी कहती हैं कि पढ़ाई के दौरान मैंने सोशल मीडिया से एकदम दूरी बना ली थी इससे मुझे अपने टॉपिक पर फोकस करने में मदद मिली.’
-ऋषिता अपनी सफलता का श्रेय इन्हें देती हैं- ऋषिता अपनी इस सफलता के बारे में कहती है कि हमारे पेरेंट्स ने हमारा बहुत सपोर्ट किया. अपनी सफलता का श्रेय मैं अपने टीचर्स को भी देना चाहूंगी कि जिनके बिना परीक्षा में इतने अच्छे मार्क्स नहीं आ सकते थे. ‘मेरे दो दोस्तों और क्लासमेट भी दूसरी पोजीशन पर आए हैं.’

-पिता हैं असिस्टेंट ऑडिटर जनरल तो माता हैं टीचर:- ऋषिता के पिता हरियाणा के जींद जिले में हरियाणा गवर्नमेंट में असिस्टेंट ऑडिटर जनरल हैं. जबकि माता प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं.

-डॉक्टर बनना चाहती हैं टॉपर ऋषिता:-
टॉपर ऋषिता आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं. वह कहती हैं कि ‘मैं डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहती हूँ. मेरा सपना है कि मैं लोगों की जान बचाऊं. क्योंकि गांव-देहात में रहने वाले लोग बिना डॉक्टर के इलाज के मर जाते हैं इसलिए मैं डॉक्टर बनकर उनकी सेवा करना चाहती हूँ.’

-ऋषिता के पिता ने कहा:-
ऋषिता के पिता कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी पर पढ़ाई के लिए कभी दबाव नहीं डाला. वह खुद अपनी पढ़ाई को लेकर केन्द्रित थी और वह रात में काफी देर तक पढ़ती थी. मैं उसके डॉक्टर बनने के फैसले का समर्थन करता हूँ और उसे डॉक्टर बनने में हर संभव मदद करूंगा. सभी माता-पिता को अपने बच्चों का सच्चा साथी होना चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए.

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