Home राज्य हरयाणा कुछ कांग्रेसियों ने किसान आंदोलन की आड़ में दुष्यंत चौटाला को बदनाम करने की कोशिश की : रणदीप मटदादू

कुछ कांग्रेसियों ने किसान आंदोलन की आड़ में दुष्यंत चौटाला को बदनाम करने की कोशिश की : रणदीप मटदादू

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कुछ कांग्रेसियों ने किसान आंदोलन की आड़ में दुष्यंत चौटाला को बदनाम करने की कोशिश की : रणदीप मटदादू
माननीय उपमुख्यमंत्री पर किसानों को है विश्वास
किसानों पर लाठीचार्ज अति निदनीय।
रणदीप सिंह मट्टदादु ने उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है की किसानों पर हुए लाठीचार्ज की जांच करवाई जाए।
विपक्ष प्रदेश में तुच्छ स्तर की राजनीति करने पर उतरा।
डबवाली।
किसान के कंधे पर बंदूक रख किसान आंदोलन को राजनैतिक रूप देने वाले  विपक्ष द्वारा खरीदे नकली किसान नेताओं को हरियाणा माफ नहीं करेगा जिन्होंने किसान आंदोलन की आड़ में अपनी ओछी राजनीति चमकाने की कोशिश की है। ये शब्द युवा जजपा नेता व प्रवक्ता रणदीप मटदादू ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहे। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों पर लाठी चार्ज करना अति निदनीय है और इसकी जांच अति आवश्यक है। उन्होंने इस लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। रणदीप सिंह मट्टदादु ने उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है की किसानों पर हुए लाठीचार्ज की जांच करवाई जाए। उपमुख्यमंत्री खुद माननीय गृहमंत्री से मिलकर पूरे मामले की गहनता से जांच करवाएं और माननीय कृषि मंत्री भी किसानो की समस्याओं को समझकर किसानों के हकों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि
सरकार द्वारा एक कमेटी बनाई जाए जो के किसानों  से मिलकर बैठक कर उनकी दुख दर्द को समझे और किसानों की समस्याओं का निदान करवाएं।उपमुख्यमंत्री दुष्यन्त चौटाला खुद भी कमेटी में शामिल हो ताकि किसानों को उनकी मुश्किलों का हल निकालने के लिए सरकार पर भरोसा मिल सके। उन्होंने कहा कि बीते दिवस किसान आंदोलन के मंच पर पट्टी बँधवा कर जो बैठे थे उनमें से अधिकतर कांग्रेसी निकले बल्कि खुद रैली का आयोजक पिछले विधानसभा चुनावों में अभय सिंह चौटाला से टिकट माँग रहा था, और न मिलने पर निर्दलीय लड़ा भी था! ये कब से किसान हितैषी हो गए? सबके सब कॉंग्रेस के एजेंट हैं। इसका एक और सबूत है कि ऐसा ही एक आयोजन आगामी दिनों में बरोदा हल्के में भी होगा जहाँ उपचुनाव होना है। जहाँ कुछ इन्हीं के एजेंट फिर तीनो अध्यादेश के बारे में बात करेंगे!! उन्होंने कहा कि अब मेरा कुछ सवाल इन फ़र्ज़ी किसान नेताओं से  है कि आखिर बरोदा में ही क्यों? और अब ही क्यों? इतने साल से कहाँ गायब थे? क्या आपने किसानों को तीनों अध्यादेश पढ़ाये? समझाए? या सिर्फ अपना अंदाजा लगा घुमा दिया? अपनी सहूलियत के अनुसार फसल बेचना कौन सा गलत कानून है म्यूच्यूअल एग्रीड प्राइस की गारंटी कौन सा गलत कानून है? फसल पर मैक्सिमम_लिमिट_प्राइस हटा कर उसके दाम को अपने हिसाब से तय करने की छूट देना कौन सा गलत है? इससे कितना आसान होगा किसान के लिए फसल बेचना, ग्राहक के लिए डायरेक्ट_किसान से कॉन्ट्रैक्ट करना यह बताया आपने किसान को। उन्होंने कहा कि आज जहाँ लघु उद्योग बढ़ रहे हैं , किसान_क्रांति कॉन्ट्रैक्ट_फार्मिंग पहाड़ों में दशकों से चल रही है, ऐसे कानून किसान को ताकत देते हैं कि उनका शोषण न हो सके!! कल रात काली कर दी तीनों अध्यादेश समझने में क्योंकि किसान सड़को पर पिटे वह मंजूर नहीं था! अगर अध्यादेश गलत होते तो मैं खुल कर विरोध करता मगर जितना भी पढ़ा यही समझ आया कि यहाँ मामला किसान का नहीं विपक्ष के साजिशन_एजेंडे का है जो किसी न किसी बहाने दुष्यन्त चौटाला को टारगेट कर रहे हैं। जबकि खुद पूरा विपक्ष गायब था रैली से क्योंकि उनको मालूम था झूठ के बुलबुले जब फटेंगे तो छींटे जरूर पड़ेंगे उनपर भी!! 
उन्होंने कहा कि कहावत है ना अपने यहाँ… बूढ़ा मरो या जवान..हत्या सेती काम!! कल इन्होंने यही किया। मेरा अनुरोध है कि अब एक बार आप तीनों_अध्यादेश पढ़ लें और यदि मेरी समझ में गलती रही हो तो मुझे भी दुरुस्त करें या मेरी बात सही निकले तो समर्थन करें व औरों को भी समझाएं। उन्होंने कहा कि कुछ कांग्रेसियों ने किसान आंदोलन की आड़ में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को बदनाम करने की कोशिश की थी जिसमे वो कभी कामयाब नही हो पाएंगे , क्योकि प्रदेश की जनता इनका दोगला चरित्र जान गई है और अब प्रदेश की जनता इनकी तुच्छ स्तर की राजनीति को प्रदेश में हावी नही होने देगी।

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