Home सिरसा जनता व कर्मचारियों की मांग नहीं तो परिवहन विभाग का निजीकरण क्यों: तालमेल कमेटी

जनता व कर्मचारियों की मांग नहीं तो परिवहन विभाग का निजीकरण क्यों: तालमेल कमेटी

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हेमराज बिरट, तेज़ हरियाणा नेटवर्क:

-स्टेज कैरिज स्कीम 2016 रद्द करने व लम्बित मांगों को लागू करने के प्रति गम्भीर नहीं सरकार। सभी डिपूओं की तालमेल कमेटी 8 जून को महाप्रबंधकों के माध्यम से महानिदेशक राज्य परिवहन को ज्ञापन सौंप कर विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने व मांगों को लागू करने की पुरजोर मांग की जाएगी।

हरियाणा रोड़वेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ नेता व हरियाणा रोड़वेज वर्कर्स यूनियन सम्बन्धित सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सरबत सिंह पूनिया, सिरसा डिपो के प्रधान मदनलाल खोथ व डबवाली सब डिपो के प्रधान पृथ्वी सिंह चाहर ने संयुक्त ब्यान में बताया गत दिवस परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के साथ बातचीत में तालमेल कमेटी ने स्टेज कैरिज स्कीम 2016 के खिलाफ तर्कों सहित लिखित सुझाव व ऐतराज देकर परिवहन विभाग के निजीकरण का डटकर विरोध किया। फिर भी कर्मचारियों के ऐतराज व सुझाव को दरकिनार करके कोरोना महामारी की आड़ में विभाग का निजीकरण कर रही हैं सरकार।
कर्मचारी नेताओं ने जोर देकर कहा प्रदेश की जनता, छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों व रोड़वेज कर्मचारियों की परिवहन विभाग के निजीकरण की मांग नहीं, फिर भी सरकार प्राइवेट बसों को रूट परमिट देकर विभाग को बर्बाद करने पर क्यों अड़ी हुई है।
उन्होंने कहा प्राइवेट बसें सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है, एक प्राइवेट बस प्रति माह सरकार को एकमुश्त 14 हजार रुपये टैक्स दे रही है, जबकि हरियाणा रोड़वेज की एक बस प्रति माह 40 हजार से 60 हजार रुपये टैक्स दे रही है। उन्होंने बताया स्टेज कैरिज स्कीम के तहत मुख्य मार्गों पर परमिट देना मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि परिवहन विभाग के निजीकरण व प्राइवेट बसें चलने से जनता को बेहतर परिवहन सेवा नहीं मिलेगी व स्थाई रोजगार के अवसर समाप्त हो जाएंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा स्टेज कैरिज स्कीम 2016 के तहत प्राइवेट बसों को रूट परमिट देने बारे अचानक आनन-फानन में स्टेज कैरिज स्कीम 2016 को लागू करने की सरकार की क्या मजबूरी हो गई। एक तरफ तो देश व प्रदेश की जनता कोरोना महामारी के संकट से जूझ रही है, दूसरी तरफ सरकार जल्दबाजी में स्टेज कैरिज स्कीम लागू करके निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करके विभाग को तहस-नहस करने पर तुली हुई है। कर्मचारी नेताओं ने कहा सरकार रोड़वेज कर्मचारियों के विरोध के चलते निवर्तमान परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता 13 जून 2017 में हुई मीटिंग में स्टेज कैरिज स्कीम को रद्द कर चुकी हैं, अब फिर सरकार इस स्कीम को लागू करके वादाखिलाफी कर रही हैं।


कर्मचारी नेताओं ने कहा सरकार प्राइवेट रूट परमिट देने की स्कीम को संशोधन करने की बजाए रद्द करें। उन्होंने कहा सरकार अगर जनहितेशी है तो पूंजीपतियों का मोह छोड़ कर विभाग में बढती आबादी अनुसार 14 हजार सरकारी बसें शामिल करें, ताकि आम जनता व छात्र-छात्राओं को बेहतर व सुरक्षित परिवहन सेवा मिलने के साथ 84 हजार बेरोजगारों को स्थाई रोजगार मिल सकें। उन्होंने बताया स्टेज कैरिज स्कीम को रद्द करने व लम्बित मांगों को लागू करने की मांग को लेकर सभी डिपूओं की तालमेल कमेटी अपने अपने डिपो में 8 जून को महाप्रबंधकों के माध्यम से महानिदेशक राज्य परिवहन को ज्ञापन भेजेंगी। उसके बाद तालमेल कमेटी की एक दर्जन टीमों द्वारा 16 जून से 29 जून तक सभी डिपूओं में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करके विभाग के निजीकरण का विरोध किया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं ने कहा परिवहन मंत्री के साथ 6 जनवरी को हुई बैठक में मानी गई मांगों को लागू ना करके सरकार कर्मचारियों को आन्दोलन के लिए मजबूर कर रही हैं। उन्होंने कहा कोरोना महामारी के दौरान मौत के मुंह में रह कर कर्मचारी जोखिम भरी ड्यूटी कर रहे हैं। परन्तु सरकार द्वारा पीपीई किट सहित सभी उपकरणों का प्रबंध नहीं किया जा रहा। उन्होंने 50 लाख रूपये एक्शग्रेसिया बीमा पॉलिसी में शामिल करने, जोखिम भत्ता व इन्सैन्टीव देने, लाॅकडाउन के समय विभाग को करोड़ों रूपये के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा आर्थिक पैकेज देने के अलावा तीन वर्ष का बकाया बोनस देने, 2002 से पहले के भर्ती कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने, परिचालकों का ग्रेड पे बढाने, कर्मशाला कर्मचारियों के कटौती किये राजपत्रित अवकाश पहले की तरह लागू करने, 2016 में भर्ती चालकों को पक्का करने,परिचालकों को ई टिक्टींग मशीन उपलब्ध करवाने, विभाग में बढ़े हुए किराये को राउंड फिगर में लागू करने, शिक्षा भत्ता व रोके गए डीए व एलटीसी का भुगतान करने, सभी खाली पदों पर पक्की भर्ती करने व सभी श्रेणियों के खाली पड़े प्रॅमोशनल पदों पर प्रमोशन करने आदि मांगों को अनेक मीटिंगों में मान लेने के बाद भी लागू नही करने से कर्मचारियों में भारी रोष है।

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